सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने सुल्तानपुर जिले में अपने उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने जिले की पांच विधानसभा सीटों में से अब तक तीन सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।
बसपा ने सुल्तानपुर विधानसभा सीट से इम्तियाज अहमद भुट्टो, लंभुआ से शैलेंद्र सिंह और सदर सीट से मधुबाला वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के मुताबिक सुल्तानपुर सीट के लिए इम्तियाज अहमद भुट्टो का नाम पार्टी प्रमुख मायावती के निर्देश पर तय किया गया है।
चुनाव से पहले उम्मीदवार घोषित करने की क्या वजह?
आमतौर पर विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के बाद प्रत्याशियों की घोषणा तेज होती है। ऐसे में बसपा का काफी पहले उम्मीदवारों के नाम सामने लाना पार्टी की चुनावी तैयारियों का संकेत माना जा रहा है।
इसका एक सीधा असर यह हो सकता है कि उम्मीदवारों को अपने विधानसभा क्षेत्र में काम करने, पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के लिए ज्यादा समय मिले।
हालांकि, उम्मीदवारों की जल्दी घोषणा अपने आप में चुनावी परिणाम का संकेत नहीं मानी जा सकती। इसका वास्तविक असर चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, संगठन और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।
2022 में कैसा रहा था BSP का प्रदर्शन?
सुल्तानपुर जिले की इन तीन सीटों पर 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सके थे।
लंभुआ विधानसभा सीट पर BJP के सीताराम वर्मा को 82,999 वोट मिले थे, जबकि BSP उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह को 42,119 वोट मिले थे।
सुल्तानपुर सदर में BJP के राज प्रसाद उपाध्याय को 85,249 वोट मिले थे और BSP के ओम प्रकाश सिंह को 39,920 वोट मिले।
वहीं सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर BJP के विनोद सिंह को 92,715 वोट मिले थे, जबकि BSP उम्मीदवार डॉ. देवी सहाय मिश्रा को 22,521 वोट मिले थे। इन आंकड़ों के मुताबिक तीनों सीटों पर BSP तीसरे स्थान पर रही थी।
सुल्तानपुर सीट पर मुकाबला रहा था बेहद करीबी
2022 के चुनाव में सुल्तानपुर विधानसभा सीट का मुकाबला खास तौर पर करीबी रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक BJP के विनोद सिंह ने समाजवादी पार्टी के अनूप संडा को 1,009 वोटों के अंतर से हराया था। वहीं BSP तीसरे स्थान पर रही थी।
ऐसे में 2027 से पहले BSP द्वारा यहां उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू होना स्वाभाविक है। हालांकि आने वाले समय में दूसरे दल किन उम्मीदवारों को मैदान में उतारते हैं और चुनावी परिस्थितियां किस तरह बदलती हैं, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।
पुराने उम्मीदवारों की जगह नए चेहरे
बसपा की इस बार की शुरुआती सूची में एक और बात ध्यान खींचती है। सुल्तानपुर, सदर और लंभुआ में पार्टी ने 2022 में उतारे गए उम्मीदवारों के बजाय नए चेहरों को जिम्मेदारी दी है।
नए उम्मीदवारों को चुनाव से काफी पहले मैदान में उतारने से उन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने का पर्याप्त समय मिल सकता है। दूसरी तरफ उनके सामने पार्टी के पुराने समर्थक आधार को सक्रिय करने के साथ नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती भी होगी।
बाकी दो सीटों पर भी जल्द घोषणा की तैयारी
सुल्तानपुर जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। BSP अब तक तीन सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। पार्टी की ओर से बताया गया है कि इसौली और कादीपुर विधानसभा सीटों के लिए भी प्रत्याशियों की घोषणा आगे की जाएगी।
अगर इन दोनों सीटों पर भी उम्मीदवारों के नाम जल्द सामने आते हैं तो पूरे जिले में बसपा की चुनावी गतिविधियां और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकती हैं।
BSP की चुनावी रणनीति में क्या संकेत?
बसपा पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को दोबारा सक्रिय करने पर जोर दे रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की शुरुआती घोषणा इसी संगठनात्मक तैयारी का हिस्सा दिखाई देती है।
जुलाई में पार्टी ने सुल्तानपुर में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन भी आयोजित किया था। इसके अलावा कार्यकर्ता सम्मेलनों और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
वहीं BSP ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पहले ही अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। यह पार्टी की घोषित राजनीतिक रणनीति है; चुनाव के समय परिस्थितियों में बदलाव की संभावना को अलग से देखा जाना होगा।
क्या समय से पहले टिकट देना BSP के लिए महत्वपूर्ण होगा?
सुल्तानपुर में BSP द्वारा चुनाव से काफी पहले प्रत्याशी घोषित करने से उम्मीदवारों को तैयारी के लिए लंबा समय जरूर मिलेगा। लेकिन इसका चुनावी प्रभाव अभी तय नहीं किया जा सकता। आने वाले महीनों में उम्मीदवारों की सक्रियता, पार्टी संगठन की स्थिति, दूसरे दलों के प्रत्याशी और स्थानीय मुद्दे सुल्तानपुर की चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए फिलहाल इसे BSP की शुरुआती चुनावी तैयारी के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।



